शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

एम्बर्स (रेडियो के लिए एक नाटक)

सैम्युअल बेकेट

एम्बर्स
(रेडियो के लिए एक नाटक)

समंदर की आवाज़ नेपथ्य में धीरे सुनाई पड़ रही है
हेनरी के जूते बजरी पर हैं। वह रुकता है
समंदर की आवाज़ अब तेज हो रही है

हेनरी: चलो  (समंदर की आवाज़ तेज है) चलो! (वह आगे बढ़ता है, जूते रेत और बजरी पर हैं, जैसे ही वह आगे बढ़ता है)। रुको। (जूते बजरी पर ही हैं, जैसे ही वह आगे बढ़ता है आवाज़ तेज होती है), रुको! (वह रुकता है। समन्दर और थोडा तेज होता है), नीचे (समंदर की आवाज़ और तेज होती है), नीचे! (जैसे ही वह बैठता है वैसे ही रेत और बजरी फिसलती है, समंदर अभी भी दूर है, जब भी विराम का संकेत होता है, तब वह दूर से सुनाई पड़ता है) मेरे पीछे कौन है? (विराम)। क्या एक अंधा और बेवकूफ बूढ़ा आदमी। (विराम)। जैसे कि वह मरा ही न हो (विराम)। नहीं, शायद वह कब्र से उठकर मेरे साथ, इस अजनबी जगह पर रहने के लिए आ गया है। (विराम)। क्या वह मुझे सुन सकता है (विराम)। हां, उन्हें मुझे सुनना ही चाहिए (विराम)। मुझे जबाव क्यों नहीं देते? (विराम), नहीं वह मुझे जबाव नहीं देते (विराम)। बस हर समय मेरे साथ ही रहते हैं (विराम)। जो आवाज़ सुनाई दे रही है, वह समंदर की आवाज़ है। (विराम, आवाज और तेज हो रही है)। मैंने कहा कानों में जो आवाज़ आ रही है वह समंदर की है, हम समंदर के किनारे पर बैठे हैं (विराम)। यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आवाज़ बहुत ही अजनबी है, समंदर की आवाज से एकदम अलग, कि उसे जब तक आप देखेंगे नहीं तब तक आपको पता ही नहीं चलेगा कि आखिर यह था क्या। (विराम) हूव्स! (विराम, आवाज़ तेज होती है) हूव्स (हूव्स के कड़ी सड़क पर चलने की आवाज़ आती है। वे धीरे धीरे दूर होते जाते हैं। विराम) फिर से! (पहले की तरह हूव्स। विराम, उत्साह से) इसे समय को बताने के लिए प्रशिक्षित करो! इसमें स्टील की नाल लगाओ । जूते पहनाओ और यार्ड में बांध दो, पूरे दिन इस पर नाल लगाओ! (विराम)। एक दस टन मैमथ जिंदा होकर वापस आ गए हैं, उनमें स्टील की नाल लगाओ और इस दुनिया को कुचलने दो! (विराम) इसे सुनो (विराम)। अब रोशनी को सुनो, तुम्हें तो हमेशा ही रोशनी पसंद थी न, तुम कभी नहीं चाहते थे कि दोपहर के बाद शाम आए, न ही अपनी परछाई और न ही समंदर का कोई किनारा और न ही कोई द्वीप। (विराम)। तुम कभी भी खाड़ी के इस तरफ नहीं जिए, तुम हमेशा चाहते थे कि शाम को नहाते समय सूरज भी समंदर में गोता लगाए। पर जब मुझे तुम्हारा पैसा मिला, मैं विचलित हुआ, जैसा तुम्हें पता होगा (विराम)। हमें कभी भी तुम्हारा शरीर नहीं मिला, क्या तुम जानते हो कि हम एक बेमतलब से समय में मौत के प्रमाण में उलझकर रहा गए थे, उन्होंने कहा कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि तुम हम सबसे कहीं दूर भाग गए हो, और किसी दूसरे झूठे नाम से अर्जेन्टाइना में जिंदा हो और मेरी मां पर इससे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।  (विराम)। मैं इसके मामले में आप की ही तरह हूं, मैं इससे दूर नहीं रह सकता और पर मैं इसके अंदर नहीं गया कभी, नहीं शायद आपके ही साथ मैं इसमें गया था (विराम)। केवल इसके नज़दीक। (विराम)। आज यह शांत है, पर मैं इसे अक्सर घर में सुनता हूं, सड़क के किनारे चलते हुए बात शुरू कर देता हूं, ओह, इसमें बाधा डालने के लिए बहुत तेज तेज, ऊंची आवाज़ में, कोई भी ध्यान नहीं देता (विराम)। पर अब मैं आपसे बात करूंगा, कोई फर्क नहीं पड़ता मैं कहां था, एक बार मैं इन सब अभिशप्त चीज़ों से पीछा छुड़ाने के लिए स्विटज़रलैंड भाग गया था, और जब तक मैं वहां था ये रुका नहीं, मैं पार न पा सका (विराम)। मुझे किसी की जरूरत नहीं है, केवल मैं ही काफी हूं, कहानियां हैं, उनमें से एक है बोल्टन नामक वृद्ध व्यक्ति के बारे में, मैंने उसे कभी ख़त्म नहीं किया, मैंने उनमें से किसी को भी ख़त्म नहीं किया, मैंने कभी किसी को ख़त्म नहीं किया। बस सब कुछ अपने आप ही हमेशा के लिए चला गया (विराम) बोल्टन (विराम, आवाज़ तेज होती है) बोल्टन! (विराम)। और आग से पहले (विराम)।  आग के अपने पूरे लाव लश्कर के आने से पहले ही सभी लटकन टूट चुकी हैं और कोई रोशनी भी नहीं है केवल आग की रोशनी है, उसमें बैठा हुआ................नहीं नहीं अँधेरे में वह आग से बचने वाले कंबल में लिपटा हुआ खड़ा है, चिमनी के तख्ते पर अपने हाथों के साथ और उसकी बाहों पर उसका सिर है, आग के अपने लाल ड्रेसिंग गाउन पर पहुँचने से पहले अँधेरे में खड़े होकर इंतज़ार कर रहे हैं, कोई भी आवाज़ नहीं है, बस केवल आग की ही आवाज़ है। (विराम) अपने लाल रंग के ड्रेसिंग गाउन में खड़े होकर वह उसी तरह आग के पास जा सकता है जैसे जब वह बच्चा था, नहीं नहीं वह उनके पजामा हैं जो अँधेरे में खड़े होकर इंतज़ार कर रहे हैं, कोई रोशनी नहीं है केवल आग है, नहीं नहीं कोई आवाज़ नहीं केवल आग की ही आवाजें हैं, वह बूढ़ा व्यक्ति बहुत बड़े संकट में है (विराम)। फिर दरवाजे पर घंटी बजाता है और जैसे ही वह खिड़की पर जाता है और लटकनों के बीच देखता है, वह बूढ़ा आदमी, बहुत बड़ी और मजबूत, सर्दियों की चमकीली रात, हर तरफ बर्फ, थोड़ा ठंडा और सफेद संसार, बोझ से तले देवदार और फिर जैसे ही बाजू घंटी बजाने के लिए ऊपर जाती है, पहचानता है ..................... होलोवे ....................(लम्बा विराम).............................या होलोवे, पहचानता है, होलोवे, नीचे जाता है और खोलता है (विराम) बाहर सब शांत है, ठहरा हुआ है, कोई आवाज़ नहीं है, अगर कान लगाकर सुनेंगे तो कुत्ते की चेन या टहनी की आवाज़ सुनाई देगी, सफेद संसार, होलोवे अपने छोटे काले थैले के साथ, कोई आवाज़ नहीं, काफी ठंडक है। पूरा चाँद छोटा और सफेद, होलोवे के जूतों के कुटिल निशान, लायर में वेगा बहुत ही हरे थे। (विराम)। लायर में वेगा बहुत ही हरे थे। फिर उनमें ये बातचीत कहाँ हुई, सीढ़ियों पर, नहीं नहीं ये सब कमरे में हुआ, ये बात कमरे में हुई “मेरे प्रिय बोल्टन, अब आधी रात हो गयी है, तुम्हारी कृपा होगी अगर..................” चुप्पी, बोल्टन “कृपया कृपया!”। सन्नाटा, मुर्दा सन्नाटा, कोई आवाज़ नहीं, केवल आग, कोयला जल रहा था, कम्बल में लिपटा होलोवे, अपने कूल्हों को गर्म करने की तैयारी में था, बोल्टन, बोल्टन कहाँ है, कोई रोशनी नहीं, केवल आग, बोल्टन खिड़की पर है, उसके पीछे लटकनें हैं, वह उन्हें अपने हाथ से पकड़ता है, देखता है, सफेद संसार, यहाँ तक कि पहाड़ों की चोटियां, उनके शिखर, पत्ते बर्फ से सफेद पड़ चुके थे, और सबसे असामान्य है घर की शांति, जहां कोई आवाज़ नहीं है, केवल आग है, कोई लपट नहीं है केवल अंगारे हैं। (विराम) अंगारे (विराम)। उछलते, कूदते, दोबारा गिरते हुए, लुकाछिपी करते हुए, अजीब भद्दी डरावनी आवाज़ निकालते हुए, होलोवे अब कालीन पर, वह बूढ़ा आदमी, छह फीट, ह्रष्ट-पुष्ट, टाँगे अलग और पीठ के पीछे उसके हाथ उसके पुराने मैक्फरलेन के पिछले हिस्से को पकडे थे, खिड़की पर बोल्टन, लाल ड्रेसिंग गाउन में वही वृद्ध व्यक्ति, लटकन के विपरीत पीछे, दरार को चौड़ा करने के लिए हाथ फैला रहा था, सफेद संसार, भयानक संकट, कोई आवाज़ नहीं केवल और केवल अंगारे।, मरते हुए, रोशनी में लिपटी हुई मौत के आगोश में जाते, होलोवे, बोल्टन, बोल्टन, होलोवे, बूढ़ा आदमी, भयानक संकट, सफेद संसार, एक भी आवाज़ नहीं (विराम)। उसे सुनो! (विराम),अपनी आँखें बंद करो और इसे सुनो, क्या सोचते हो यह क्या था? (विराम, प्रचंडता के साथ आवाज़) एक बूँद, रिसाव! एक रिसाव (रिसाव की आवाज़, तेजी से बढ़ती हुई, और अचानक से बंद होती है) फिर से (रिसाव फिर से। बढ़ता है)। नहीं! (रिसाव बंद होता है! विराम) पिता जी! (विराम, गुस्सा होता है), कहानियां, कहानियां, और बरस दर बरस केवल कहानियां ही कहानियां, मुझे भी जरूरत थी, किसी ऐसे की जो मेरे साथ होता,कोई भी एक अजनबी, मुझसे बात करता, वह मुझे सुनता,कितने बरस हो गए ऐसा हुए और उसके लिए जो मुझे बचपन से जानता, मेरे साथ होता, मुझे सुनता, मैं अब क्या हूं वह जानता, मैं क्या हूं यह उसे पता होता.......... (विराम)। कोई नहीं (विराम), न ही वहां। (विराम)। एक बार और कोशिश (विराम) सफेद संसार, कोई आवाज़ नहीं। (विराम)। होलोवे। (विराम)।होलोवे ने कहा वह जाएगा, भगवान न करे अगर वह पूरी रात एक काली अंगीठी के पास ही बैठा हो, वह नहीं समझता, एक पुराने दोस्त को बनाए, एक पुराने दोस्त को, सर्दी और अँधेरे में, एक पुराना दोस्त बहुत जरूरी होता है, बैग लाता है, फिर कोई शब्द नहीं, कोई व्याख्या नहीं, कोई गर्मी नहीं, कोई रोशनी नहीं, बोल्टन: “कृपया! कृपया!” होलोवे, कोई मनोरंजन नहीं, कोई स्वागत नहीं, अपनी मज्जा तक थमा हुआ ठंडा, उसकी मौत को देखो, नहीं समझ सकता, अजनबी व्यवहार, पुराना दोस्त, बोलता है वह जाएगा, हिलता नहीं, एक भी आवाज़ नहीं, आग बुझ रही है, खिड़की से बाहर आते सफेद धुंए के कतरे, भयानक द्रश्य, भगवान से चाहता है कि वह आया न होता, कोई सामान नहीं, आग बुझ गयी है, बहुत ठंड, भयानक संकट, सफेद संसार, कोई आवाज़ नहीं, कोई सामान नहीं। (विराम) कोई सामान नहीं (विराम) इसे नहीं कर सकता (विराम)। इसे सुनो (विराम)। पिताजी (विराम) आप मुझे अब नहीं जानते होंगे, आपको दुःख होगा कि कभी मैं आपका था, पर आप तो वाकई बेकार हो थे, मैंने आपसे आख़िरी शब्द यही सुना था, बेकार (विराम)। अपने पिता की आवाज़ की नक़ल बनाना) “क्या तुम गोता लगाने आ रहे हो?” “नहीं” “अरे आओ न, आओ न” घूरना, दरवाजे को मारना, मुड़ना और फिर घूरना “तुम एक बेकार और असफल व्यक्ति हो, एकदम असफल!” (दरवाजे को बहुत जोर से बंद करना, विराम)/ फिर से (मारना, विराम)। बर्बाद जिंदगियां इसी तरह ख़त्म होती हैं! (विराम) बेकार (विराम)। उम्मीद करता हूं कि उसके पास हो (विराम)। कभी भी एडा से नहीं मिला,क्या आप या क्या आप, मुझे यदा नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ता, कोई उसे अब जानता नहीं है। (विराम)। उसे मेरे खिलाफ आखिर किसने कर दिया, क्या आपको पता है, शायद उस भयानक छोटे बच्चे ने, मैं भगवान से चाहता हूं कि वह वो हमारे पास कभी न होती, मैं उसके साथ उसका हाथ पकड़कर चलता था, जीसस, कितना अजीब था कि वह मुझे हाथ छुड़ा कर कभी जाने न देती थी और मैं बात करने से पागल हो रहा था। “साथ भागो एडी और मेमने को देखो” (एडी की आवाज़ की नक़ल) “नहीं पिता जी” “जाओ, जाओ” (फरियाद करते हुए)नहीं पिता जी (हिंसक)। “जब भी तुम्हें बोला जाए, तुम्हें जाना होगा और मेमने को देखो!” (एडी का भरी विलाप। विराम)। एडा के साथ बात करना भी कभी कभी गुनाह लगता था, छोटी छोटी बातों से लेकर उन पुराने सुनहरे दिनों के बारे में बात करना जब हम सोचते थे कि काश हमें मौत आ जाती (विराम)। पचास साल पहले एक नकली राजकुमार (विराम) और आज (विराम, एक औपचारिक नाराजगी के साथ)। ब्लूबैंड का राजकुमार। (विराम), मैं आपसे बात करके थक गया हूँ (विराम)। हमेशा ऐसा होता है, आपसे बात करते करते पूरे पहाड़ों पर चढ़ते जाओ और फिर एकदम से चुप हो जाना और घर को संकटों में छोड़ देना और सप्ताहों तक खुद से एक भी शब्द न बोलना, एक हरामी की तरह मनहूस, इससे बेहतर है मर जाना, इससे बेहतर है मरजाना। (लम्बा विराम) एडा (विराम, जोर से) एडा!
एडा: (कहीं दूर से आती हुई आवाज़) हां
हेनरी: क्या तुम यहाँ पर काफी समय से थी?
एडा: थोड़े समय से। (विराम) तुम क्यों रुके, मेरी चिंता न करो। (विराम)। क्या तुम चाहते हो मैं चली जाऊं? (विराम) एडी कहाँ है?
विराम
हेनरी: अपने संगीत के अध्यापक के साथ। (विराम) क्या आज तुम मुझे जबाव दोगी?
एडा: तुम्हें ठन्डे पत्थरों पर नहीं बैठना चाहिए, इससे तुम सही से बढ़ नहीं पाओगे। जरा उठो तो, मैं अपना शॉल तुम्हारे नीचे रख दूं (विराम) क्या अब सही लग रहा है?
हेनरी: यकीनन ही बेहतर है, कोई मेल ही नहीं। (विराम)। क्या तुम मेरे साथ बैठने जा रही हो?
एडा: हां। (जब वह बैठती है तो कोई आवाज़ नहीं आती) ऐसे? (विराम) या क्या तुम चाहते हो ऐसे बैठूं? (विराम) तुम्हें कोई परवाह नहीं (विराम) मुझे लगता है बहुत ठंड है आज, तुमने अपने जैगर तो पहने ही होंगे? (विराम) क्या तुमने अपने जैगर पहने हैं, हेनरी?
हेनरी: वो हुआ यूं, कि मैंने उन्हें पहना तो और फिर मैंने उन्हें पहना और फिर मैंने उन्हें उतार दिया, और फिर मैंने उन्हें पहना और उतारा और फिर से उतारा, फिर से पहना और उतारा और फिर मैंने..................
एडा क्या तुमने अभी पहने है?
हेनरी: मुझे नहीं पता। (विराम) हूव्स! (विराम, तेज) हूव्स (हूव्स की कड़ी सड़क पर चलने की आवाज़ आती है, वह अपने आप गायब हो गयी) फिर से!
हूव्स पहले ही की तरह। विराम
एडा: क्या तुमने यह सुनाई दिया?
हेनरी: बहुत ज्यादा नहीं
एडा: तेज चल रहा है?
हेनरी: नहीं (विराम) क्या एक घोडा समय बता सकता है?
विराम
एडा: मुझे नहीं लगता कि मुझे इस सवाल का जबाव पता है
हेनरी (झुंझलाकर) क्या किसी घोड़े को प्रशिक्षित किया जा सकता है कि वह अपनी चार टांगों पर खड़ा होकर समय का पता लगा सकता है?
एडा: ओह (विराम)। मेरी कल्पना में जरूर एक घोडा था वह ऐसा करता था। (वह हंसती है। विराम) हंसो हेनरी: मैं रोज मजाक नहीं करती। (विराम) हेनरी, सुनो, क्या तुम मेरे लिए हंस नहीं सकते?
हेनरी: क्या तुम चाहती हो मैं हंसू?
एडा: तुम्हारी हंसी इतनी आकर्षक है कि शायद इसी के कारण मैं तुमपर फिदा हुई थी। तुम्हारी हंसी और तुम्हारी मुस्कान (विराम)। हंसो न, इससे हम अपने पुराने दिनों को दोहरा सकेंगे।
विराम, वह हंसने की कोशिश करता है। नहीं हंस पाता
हेनरी: शायद मुझे इस मुस्कान से शुरू करना चाहिए (मुस्कान के लिए विराम) क्या यह तुम्हें आकर्षित करता है? (विराम)। अब मैं फिर से कोशिश करूंगा (लम्बी भयानक हंसी) क्या यह पहले की तरह आकर्षक हो सका?
एडा: ओह हेनरी
विराम
हेनरी: इसे सुनो! (विराम) होंठ और पंजे! (विराम) इसे दूर ले जाओ! जहां से यह मुझे खोज न पाए! महाप्रस्थ! क्या?
एडा: खुद को शांत करो
हेनरी: और मैं इसके किनारे पर रहता हूँ? क्यों? पेशेवर मजबूरी है क्या? (संक्षिप्त हंसी)। सेहत का कारण (संक्षिप्त हंसी)। पारिवारिक संबंध? (संक्षिप्त हंसी) कोई औरत? (हँसता है और इसमें वह भी उसके साथ हंसती है) कुछ पुरानी कब्रें, जिनसे मैं खुद को अलग नहीं कर सकता? (विराम) इसे सुनो! यह कैसा है?
एडा: यह एक पुरानी आवाज़ है, जिसे मैं पहले सुना करती थी। (विराम) यह उसी जगह पर किसी और समय की तरह है (विराम)। यह कठोर है, हम पर ऊपर से छिड़का जाता है। (विराम) अजीब ही है कि यह पहले खुरदुरा हो सकता था (विराम) और अब शांत
विराम
हेनरी: हमें उठना चाहिए और चलना चाहिए
एडा: चलना? कहां? और एडी? उसे बहुत निराशा होगी जब वह यहां आएगी और देखेगी कि तुम उसके बिना ही चले गए हो? (विराम) तुम आखिर उसे अपने पास रखे क्यों हो?
पर्दा गिरता है
पियानो के केस पर गोलाकार पैमाना आता है। अस्थिर, ऊंचे और नीचे सुरों के साथ एडी ए फ्लैट मेजर, बजाती है, हाथ पहले एक साथ होते हैं, फिर उलटे चलते हैं, विराम
संगीत अध्यापक (इटली के उच्चारण में) सैंटा सेसिलिया
एडी: क्या मैं अब अपना पीस बजा सकती हूँ, कृपया?
विराम।
संगीत अध्यापक पियानो केस पर रूलर के साथ वाल्टज टाइम के दो बार की धुन बजाता है। एडी ए फ्लैट मेजर, में शोपिन के पांचवे वाल्टज के ओपनिंग बरस को बजाती है। जैसे ही वह बजाती है संगीत अध्यापक की धुन का समय हल्का होता जाता है। बॉस के पहले तार में, बार 5, में वह एफ की जगह ई बजा देती है, पियानो केस पर रूलर की दोबारा आवाज़ आती है। एडी बजाना बंद कर देती है।
संगीत अध्यापक (गुस्से से) फा!
एडी (आँखों में आंसू लाते हुए): क्या?
संगीत अध्यापक:एफ एफ!
एडी: (आँखों में आंसू लाते हुए) कहाँ?
संगीत अध्यापक: (गुस्से में) कवा! (वह नोट उछालता है) फा! विराम। एडी दोबारा शुरू करती है। संगीत अध्यापक रूलर के साथ हलके हलके बीट करता है। जब वह बार 5 पर पहुँचता है, तब वह कुछ गलतियां कर देती है। पियानो के केस पर बहुत ही तेज प्रहार। एडी रुकती है, बजाती है और रोना शुरू कर देती है।
संगीत अध्यापक : (पागलों की तरह): एफ! एफ! (वह नोट पर टोकता है) एफ! (वह नोट पर टोकता है) एफ! और एडी का रोना एक आक्रमण में बदल जाता है और पर्दा गिरता है । विराम
एडा:  तुम आज शांत हो
हेनरी: उसे इस दुनिया में घसीटना सही नहीं है, अभी उसे पियानो ही बजाना चाहिए
एडा: उसे सीखना चाहिए, वह सीखेगी। वह और घुड़सवारी।
हूव्स का आना
घुड़सवारी प्रशिक्षक: अब मिस! यहाँ पर कोहनी मिस! हाथ नीचे मिस! (हूव्स ढुलकता है) अब मिस! पीछे सीधे मिस! पीछे सीधे मिस! घुटने अन्दर मिस! (हूव्स कदमताल करता है) अब मिस! पेट अंदर मिस! ठुड्डी ऊपर मिस! (हूव्स चौकड़ी भरता है) अब मिस! आँखें सामनें मिस! (एडी को रोना आने लगता है) अब मिस! मिस!
चौकड़ी भरता हुआ हूव्स “अब मिस!” और एडी का क्रंदन चीख में बदल जाता है और पर्दा गिरता है । विराम।
एडा: तुम क्या सोचते रहते हो? (विराम) मुझे सिखाया नहीं गया और अब बहुत देर हो गयी है। मेरी पूरी जिंदगी इसका अफसोस रहेगा।
हेनरी: तुम्हारा सबसे मजबूत पहलू क्या था, मैं भूल गया।
एडा: ओह....................... मुझे लगता है रेखागणित, समतल और ठोस।(विराम) पहले समतल और फिर ठोस। (जैसे ही वह उठता है, रेत गिरती है) तुम क्यों उठे?
हेनरी: मैंने सोचा मुझे कम से कम पानी के किनारे से कहीं दूर जाने की कोशिश तो करनी चाहिए। (एक उच्छ्वास के साथ) और वापस आना चाहिए। (विराम) मेरी बूढ़ी हड्डियों को खींचों।
विराम
एडा: खैर क्यों तुम ऐसा क्यों नहीं करते? (विराम) उसके बारे में सोचते हुए यहां खड़े न रहो (विराम) घूरते हुए यहां खड़े न हो (विराम, वह समंदर की तरफ जाता है। रेत पर उसके जूते हैं, वह दस कदम जाता है। पानी के किनारे पर जाकर वह रुक जाता है। विराम। समंदर थोड़ा और तेज होता है। दूर) अपने अच्छे जूते को खराब मत करो
विराम
हेनरी: नहीं करो, नहीं
समंदर अचानक से अशांत हो जाता है।
एडा: बीस बरस पहले याचना कर रही हैं। नहीं नहीं
हेनरी: (तुरंत करता है) प्रिय
एडा (करती है, ज्यादा अस्पष्ट रूप से) नहीं
हेनरी (करता है, खुश होकर) प्रिय!
अशांत समंदर। एडा रोती है। रोती है और समंदर का विस्तार होता है,बंद होता है। पुरानी स्मृतियों का अंत होता है। विराम। समंदर शांत है। वह गहरे फैले हुए समंदर के किनारे पर वापस जाता है। जूते रेत में धंसे जा रहे हैं। वह रुकता है।विराम। वह आगे बढ़ता है। रुकता है। विराम। समंदर शांत है और शिथिल हो रहा है।
एडा: इस बीच की जगह पर खड़े न रहो। (विराम। वह रेत पर बैठता है) शॉल पर (विराम)। क्या तुम्हें डर है कि हम छू सकते हैं? (विराम) हेनरी
हेनरी: हां
एडा: तुम्हें अपनी बोली के लिए किसी चिकित्सक से मिलना चाहिए, यह बहुत ही खराब है, जबकि यह एडी की तरह होनी चाहिए थी? (विराम)। क्या तुम जानते हो जब वह छोटी थी तो उसने मुझसे क्या कहा था, उसने कहा था “माँ, पिताजी हमेशा बात ही क्यों करते रहते हैं? उसने तुम्हें शौचालय में सुना था। मैं नहीं जानती क्या जबाव दूं।”
हेनरी: पिताजी! एडी! (विराम) मैंने तुमसे कहा था कि उससे कहो कि मैं प्रार्थना कर रहा हूं। (विराम) भगवान और उसके संतों पर प्रार्थनाओं की बारिश कर रहा हूं
एडा: यह बच्चे के लिए बहुत ही बुरा है। (विराम) यह कहना बेवकूफी है कि  यह तुम्हें यह सब सुनने से रोकता है, यह तुमने इसे सुनने से नहीं रोकता और अगर ऐसा होता भी है तो तुम्हें इसे नहीं सुनना चाहिए, तुम्हारे दिमाग में जरूर ही कोई गड़बड़ है।
विराम
हेनरी: कि मुझे यह नहीं सुनना चाहिए!
एडा: मुझे नहीं लगता कि तुम इसे सुनते हो। और अगर तुम ऐसा करते हो तो इसमें क्या गलत है। यह बहुत ही शांतिपूर्ण विनम्र और कानों को सुकून देने वाली आवाज़ है तो तुम इससे नफरत क्यों करते हो? (विराम) और अगर तुम इससे नफरत करते हो तो क्यों खुद को इससे दूर नहीं रखते? तुम हमेशा यहां क्यों आ जाते हो? (विराम) तुम्हारे दिमाग में कुछ तो चलता ही है, तुम होलोवे को देखना चाहते हो, क्या वह जिंदा है है न?
विराम
हेनरी: (वहशीपन से) धमाका, मैं धमाका चाहता हूँ! ऐसे! (वह रेत में कुछ खोजता है, दो बड़े पत्थर उठाता और उन्हें आपस में रगड़ना शुरू कर देता है) पत्थर! (टकराता है)पत्थर! (टकराता है! “पत्थर” और दोनो को और भी तेज रगड़ता है, बंद कर देता है। वह एक पत्थर दूर फ़ेंक देता है। उसके गिरने की आवाज़ आती है।) यह है ज़िन्दगी! (वह दूसरा भी पत्थर दूर फेंकता है। उसके गिरने की आवाज़) न कि यह..................(विराम)........................छि!
एडा: और ज़िन्दगी क्यों? (विराम) ज़िन्दगी ही क्यों, हेनरी? (विराम) क्या यह किसी के बारे में है?
हेनरी: किसी भी जिंदा व्यक्ति के बारे में नहीं!
एडा: मुझे जहां तक लगता है (विराम) जब हम कुछ होने की इच्छा करने लगते हैं तो यह किसी न किसी के कारण तो होता ही है। अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस जगह रेत जमी हो या बर्फ।
हेनरी: हां, तुम हमेशा ही रंगीली बातचीत में देखे जाने से बचती हो न। जैसे ही कोई ऐसी बात शुरू हुई नहीं कि तुम एकदम मैचेस्टर गार्जियन में तब्दील हो जाती हो। (विराम)। वह छेद अभी भी वहीं है, इतने बरसों के बाद भी। (विराम। बहुत जोर से) वह छेड़ अभी भी वहीं हैं।
एडा: कौन सा छेद? धरती तो छेदों से भरी पड़ी है।
हेनरी: जहां हमने यह शायद पहली बार किया था
एडा: ओह हां, मुझे लगता है कि मुझे याद है। (विराम) वह जगह अभी बदली नहीं है।
हेनरी: ओह, हां, यह बदल चुकी है। (बहुत आत्मविश्वास से) उसका कुछ समतलीकरण हो रहा है। (विराम) अब वह कितने बरस की है?
एडा: मैंने गिनना बंद कर दिया।
हेनरी: बारह? तेरह? (विराम) चौदह?
एडा: मैं तुम्हें वाकई नहीं बता सकती, हेनरी।
हेनरी: मुझे उसे पाने में बहुत समय लगा है। (विराम)। कई बरसों तक हम एक दूसरे से अलग रहे हैं (विराम)। पर हमने यह अंत में किया। (विराम) इसे सुनो! (विराम)। जब तुम इससे बाहर आ जाती हो तो इतना भी बुरा नहीं है। (विराम) शायद मुझे मर्चेंट नेवी में जाना चाहिए था।
एडा: तुम जानते हो कि यह केवल सतह पर है, ऊपरी है। इसके नीचे सब कुछ कब्र की तरह ही शांत होता है। कोई आवाज़ नहीं। चाहे दिन हो या रात हो, कोई भी आवाज़ नहीं। कोई स्पंदन नहीं, कोई कोलाहल नहीं।
विराम
हेनरी: अब मैं ग्रामोफोन साथ कुछ घूमना चाहता हूँ। पर मैं उसे आज भूल गया।

एडा: इसका कोई फायदा नहीं है। (विराम) उसे डुबोने का कोई फायदा नहीं है। (विराम) देखो होलोवे
विराम
हेनरी: चलो न नौका से चलते हैं!
एडा: नाव की सवारी? और एडी? उसे बहुत खराब लगेगा जब वह यहाँ आएगी और उसे पता चलेगा कि तुम उसके बिना ही चले गए हो। (विराम)। तुम अभी अभी कहां थे? (विराम) मुझसे बात करने से पहले
हेनरी: मैं अपने पिता के साथ था
एडा: ओह (विराम) इस बारे में कोई कठिनाई नहीं।
हेनरी: मेरा मतलब है कि मैं उन्हें अपने पास लाने के लिए खोज रहा था (विराम)। तुम पहले की तुलना में आज बहुत दुष्ट लग रही हो एडा (विराम)। मैं उनसे पूछ रहा था कि क्या वे मुझसे कभी मिले हैं, मुझे तो याद नहीं
एडा: फिर?
हेनरी: उन्होंने मुझे कोई जबाव नहीं दिया।
एडा: मुझे लगता है कि तुमने उन्हें खुद पर ओढ़ रखा है (विराम) तुम्हें उन्हें जिंदा होने पर खुद पर डाला था और उनके मर जाने के बाद अब तुमने उन्हें खुद पर एकदम ही ओढ़ लिया है। (विराम) एक समय ऐसा आएगा कि तुमसे कोई भी इंसान बात नहीं कर पाएगा (विराम) आएगा वह दिन जब कोई भी तुमसे बात नहीं कर पाएगा, यहाँ तक कि कोई अजनबी भी नहीं। (विराम)। तुम अपनी आवाज़ के साथ ही अकेले हो जाओगे, और वहां पर दुनिया की कोई आवाज़ नहीं होगी, होगी तो केवल तुम्हारे आवाज। (विराम) क्या तुम मुझे सुन रहे हो?
हेनरी: मुझे याद नहीं पड़ता कि वे तुमसे कभी मिले थे।
एडा: तुम जानते हो कि वे मुझसे मिले थे
हेनरी: नहीं एडा, मैं नहीं जानता, मुझे माफ करना। मैं तुमसे जुड़ी लगभग हर बात भूल चुका हूं।
एडा: तुम वहां नहीं थे।, केवल तुम्हारी माँ और बहन थी। मैंने तुम्हें बुलाने के लिए आवाज़ लगाई थी। हम एक साथ नहाने जा रहे थे।
विराम
हेनरी: (झुंझला कर) बोलती रहो, बोलती रहो! न जाने लोग बोलते बोलते रुक क्यों जाते हैं?
एडा: उनमें से कोई नहीं जानता था कि तुम कहाँ थे?  तुम अपने बिस्तर पर सोए नहीं थे। हर कोई एक दूसरे पर चीख चिल्ला रहा था। तुम्हारी बहन से कहा कि वह पहाड़ों की चोटी से छलांग लगा लेगी। तुम्हारे पिता उठे और दरवाजे को धक्का देकर बाहर गए। मैं भी उनके पीछे पीछे भागी और सड़क पर उनसे आगे निकल गई। उन्होंने मुझे नहीं देखा। वे समन्दर की तरफ देखते हुए एक चट्टान पर बैठे हुए थे। उनकी वह भंगिमा अभी तक मेरे दिल में है, मैं भूली नहीं हूं उसे। और हां, चूंकि वह बहुत ही आम भंगिमा है और तुम भी अक्सर वैसे ही बैठते हो। शायद मैं उनकी उस जड़ता के कारण उसे अपने जेहन से नहीं निकाल पाई हूं, क्योंकि वह एकदम पत्थर बन गए थे। मैं उसे कभी समझ नहीं पाई
विराम
हेनरी: बोलती रहो, बोलती रहो! (याचना करते हुए) बोलती रहो, एडा, हर शब्द मेरे लिए अमृत की एक बूँद है
एडा: बस यही, यही मुझे याद है। (विराम) तुम्हारी या तुम्हारे पिता की कहानी याद करना या जो भी तुम कर रहे थे,  अब वाकई मुझे याद नहीं है
हेनरी: मैं नहीं कर सकता! (विराम) मैं इसे और नहीं कर सकता
एडा: तुम एक क्षण पहले ही तो कर रहे थे, मुझसे बात करने से एकदम पहले तक
हेनरी (गुस्से से): पर मैं अब इसे और नहीं कर सकता! (विराम) ओह प्रभु
विराम
एडा: हां, तुम जानते हो कि मेरा मतलब क्या है, आदमी के दिमाग में कई तरह के विचार और आदतें कई कारणों से होती हैं, वे दिमाग में कैसे जाती हैं, सब कुछ पता होता है, जैसे जब किसी भी व्यक्ति को लगता है कि उसे कोई चीज़ उठानी है तो वह नीचे झुकता है या कोई हाथ बीच हवा में झूलता है जैसे वह अनाथ हो। तो यह बात है। पर तुम्हारे पिता जिस तरह से चट्टान पर बैठे हुए थे, उस दिन ऐसा कुछ  नहीं हुआ था जो मैं तुम्हें उंगली पर गिनकर बता सकती हूँ और कह सकती हूं कि यह यह उस दिन हुआ था। नहीं मैं नहीं बता सकती, मुझे कभी वह याद नहीं आ सकता है। शायद जैसे मैंने कहा उनके शरीर का कड़ापन, जैसे उनमें कोई सांस न बची हो। (विराम)। क्या तुम्हारी मदद करना बेवकूफी है, हेनरी? (विराम) अगर तुम चाहो तो मैं और कुछ और याद करने की कोशिश कर सकती हूं। (विराम) नहीं? (विराम)। तो मुझे लगता है कि वापस जाना चाहिए

हेनरी: अभी नहीं! तुमने बोलने की जरूरत नहीं है, केवल सुनना। सुनो भी नहीं तो केवल मेरे साथ रहो (विराम)। एडा! (विराम। तेज आवाज़ में)  एडा! (विराम) हे प्रभु (विराम)! हूव्स (विराम। तेज आवाज़ में)। हूव्स (विराम) । हे प्रभु! (लंबा विराम) उनके जाने के बाद, सड़क पर आपसे आगे निकलते हुए, आपने नहीं देखा, ......................की तरफ देखते हुए (विराम), क्या समंदर को नहीं देखा जा सकता था (विराम) जब तक कि आप दूसरी तरफ नहीं मुड़ गए? (विराम) पिताजी! (विराम) मुझे अनुमान लगाना चाहिए। (विराम) वह आपको कुछ समय तक खड़े होकर देखती रही, और फिर ट्रैम की तरफ चली गयी,  ऊपर गयी और सामने की तरफ बैठी (विराम)। सामने की तरफ बैठ गयी (विराम) और अचानक से उसे अजीब सा महसूस होने लगा और वह नीचे आती है, कंडक्टर “क्या आपने इरादा बदल दिया है मिस?” वह रास्ते पर आती है अब आपका कोई संकेत नहीं दिख रहा है। (विराम) बहुत ही अप्रसन्न और बेचैन है, एक क्षण को रुकती है, कोई भी नहीं है, समंदर से बहुत ठंडी हवाएं आ रही हैं, वह वापस जाती है और घर जाने के लिए वापस ट्राम लेती है। (विराम) हे प्रभु! (विराम) “मेरे प्रिय बोल्टन......................”  (विराम) “अगर यह एक इंजेक्शन है जो तुम्हें चाहिए था, तो बोल्टन अपनी ट्राउजर नीचे करो, और मैं तुम्हें यह लगाऊंगा, मेरे पास एक नौ में एक पैन्हीस्टरेक्टोमी है” और इसे बेहोश होकर ही दिया जा सकता है। (विराम) आग बंद हो चुकी है, बहुत ठण्ड है, सफेद संसार, भयानक संकट, कोई आवाज़ नहीं (विराम) बोल्टन ने पर्दे से खेलना शुरू कर दिया है, कोई लटकन नहीं, बताना मुश्किल है, इसे वापस लेता है, उसकी तरफ चुन्नटें आती हैं, और चाँद उसमें से झाँक रहा है, और फिर उसे वापस गिराता है, भारी वेलवेट का बना हुआ है और कमरे में अन्धेरा छा जाता है, फिर उसकी तरफ जाता है, सफेद, काला सफेद, काला, होलोवे। “प्रभु के लिए उसे बंद कर दो, बोल्टन, क्या तुम मुझे ख़त्म करना चाहते हो?” (विराम) काली, सफेद, काली, सफेद, पागल बनाने वाली चीज़ें। (विराम) फिर उसने अचानक से माचिस जलाई, बोल्टन ने मोमबत्ती जलाई, उसके सिर के ऊपर पकड़ता है और चलता है और होलोवे की आँखों में आँखें डालकर देखता है। (विराम) निशब्द, केवल देखना, बूढ़ी नीली आँखें, एकदम भावहीन, जिनकी बरौनियाँ झड़ चुकी हैं, पलकें ढीली हो चुकी हैं,सब चीज़ें तैर रही हैं, और मोमबत्ती उसके सिर के ऊपर हिल रही है। (विराम) आंसू? (विराम, लंबी हंसी) ओह प्रभु नहीं, बिलकुल नहीं। (विराम) एक भी शब्द नहीं, केवल देखना, नीली बूढ़ी आँखें, होलोवे “अगर तुम्हें एक शॉट चाहिए तो ऐसा कहो और भगवान के लिए मुझे यहाँ से जाने दो” (विराम) “हम यह पहले कर चुके हैं बोल्टन, मुझसे ये दोबारा करने के लिए न कहो” (विराम) बोल्टन “कृपया” (विराम) कृपया, (विराम) “होलोवे कृपया”। (विराम) मोमबत्ती हिल रही है और इधर उधर बूँद बूँद कर चुआ रही है, अब नीचे है और बूढ़ी बांह थक चुकी है और उसने इसे दूसरी बांह में पकड़ लिया है, जैसा वह हमेशा करता था, रात है, और अंगारे ठंडे हो रहे हैं, और आपकी बूढ़ी मुट्ठी में कम्पन हो रहा है, और आप कह रहे हैं कृपया! कृपया (विराम) भीख मांगते हुए (विराम) ओह बेचारा (विराम) एडा! (विराम), पिताजी (विराम) प्रभु (विराम)। इसे ऊपर पकड़ें, शरारती संसार, होलोवे को फिक्स करता है, आँखें बंद हो रही हैं, फिर से कुछ नहीं पूछ रहा, केवल देखता है, होलोवे उसका चेहरा ढकता है, कोई आवाज़ नहीं, सफेद संसार, बहुत ठण्ड, भयानक द्रश्य, बूढ़ा आदमी, भयंकर संकट, नहीं अच्छा नहीं, (विराम) अच्छा नहीं हो रहा है। (विराम) प्रभु! (विराम, जैसे ही वह उठता है रेत गिरती है। वह समंदर की तरफ जाता है। जूते रेत पर हैं, वह रुकता है, विराम, समंदर और तेज होता है) चलो (विराम, वह चलता है। जूते रेत पर हैं, वह पानी के किनारे पर जाकर रुकता है, विराम, समंदर और तेज होता है) छोटी किताब। (विराम) यह शाम,....................(विराम), इस शाम कुछ नहीं (विराम) कल, कल.................। नौ बजे नलसाजी? (विराम) ओह हां, बर्बादी.....................(विराम) शब्द (विराम) शनिवार ...........................कुछ नहीं। रविवार,........................ रविवार, पूरे दिन कुछ नहीं (विराम) कुछ नहीं, पूरे दिन कुछ नहीं (विराम) पूरे दिन, पूरी रात कुछ नहीं (विराम) कोई आवाज़ नहीं


समंदर। 

बुधवार, 3 अगस्त 2016

क्रिस्टीना रोजेटी की कविता - क्या वाकई तुम भूल गए

क्या भूल गए तुम कि कैसे गर्मी की उस रात में,
टहल रहे थे हम दोनों ले चांदनी को साथ में,
जबकि हवा के गर्म झोंके हमें सुना रहे थे लोरियां?
क्या भूल गए तुम कि कैसे सराहा था तुमने अँधेरे और
रोशनी को; हां घबरा नहीं रहे थे पर नहीं थे बहुत सहज भी?
और कैसे कहा था तुमने कि चांद की चमक की जगह
भा रही है सितारों की टिमटिमाती रोशनी? पर बहुत जल्द ही,
तुम शर्माए और तुम्हारी बातों पर घूम गयी संदेह की सुई,
हम टहलते रहे थे बेपरवाह समय की सीमाओं से,
जब तक न चेताया हमें सुदूर चर्च की पहली घंटी की धुन ने,
हम मुड़े एकदम से और पहुँच गए हवा के परों पर होकर सवार,
घंटी की दूसरी धुन से ही पहले,
मगर क्या; क्या वाकई उन लम्हों को तुम गए हो भूल?

ओह, फिर मैं ही कैसे संजो सकी उन क्षणों की धूल?


Have you forgotten how one Summer night
We wandered forth together with the moon,
While warm winds hummed to us a sleepy tune?
Have you forgotten how you praised both light
And darkness; not embarrassed yet not quite
At ease? and how you said the glare of noon
Less pleased you than the stars? but very soon
You blushed, and seemed to doubt if you were right.
We wandered far and took no note of time;
Till on the air there came the distant call
Of church bells: we turned hastily, and yet
Ere we reached home sounded a second chime.
But what; have you indeed forgotten all?
Ah how then is it I cannot forget?





मंगलवार, 2 अगस्त 2016

सैम्युअल बकेट - द एक्स्पेल्ड


शायद वे बहुत ज्यादा लोग नहीं थे। ऊपर जाते समय और नीचे जाने के समय हज़ारों बार मैंने उन्हें गिना होगा, पर यकीनन ही शक्ल और आंकड़े बिलकुल ही मेरे दिमाग से निकल चुके हैं। मुझे नहीं पता कि क्या आपको सड़क की पटरी पर चलते हुए एक कदम, या दो कदम या पहले कदम के बाद आने वाले वे तमाम कदम, या फिर पटरी को बिलकुल गिनना ही नहीं चाहिए। बहुत सारे क़दमों के आ जाने पर तो मुझे भी यही भ्रम हुआ था। वहीं दूसरी तरफ से यानि ऊपर से नीचे तक सब कुछ एक ही जैसा था, सब कुछ वही था, आवाज़ बहुत तेज नहीं आ रही थी। मुझे नहीं पता था कि कहाँ से शुरू करना है और कहाँ पर ख़त्म करना है, हकीकत तो यही थी। मुझे कुल मिलाकर तीन लोग लग रहे थे, मुझे नहीं पता था कि इन तीनों में से कौन सा सही था। और जब मैं ये कह रहा हूँ कि मेरे दिमाग से ये आंकड़े उड़ चुके हैं, गायब हो चुके हैं तो मैं यह मानता हूं कि वाकई इन तीनों में से कोई भी मेरे दिमाग में अब नहीं है, ये तीनों ही वहां से न जाने कहां जा चुके हैं। हां, यह भी सच है कि अगर मुझे अपने दिमाग में यह पता करना होगा कि आखिर वह कौन है तो मैं शर्तिया ही उसे खोज लूंगा और केवल उसका ही पता लगा पाऊंगा, फिर ये पता नहीं चलेगा कि बाकी दो कौन हैं। और अगर मुझे दूसरे को खोजना होगा तो मैं तीसरे को नहीं पहचान पाऊंगा। नहीं, नहीं, मुझे उन तीनों को ही पहचानने के लिए काम करना होगा, मुझे उन तीनों को ही खोजना होगा। यादें मारती हैं, यादें हमें नष्ट कर देती हैं। तो आपको बिलकुल भी ऐसी कुछ चीज़ों को याद नहीं करना चाहिए जो आपको प्रिय हैं या बल्कि आपको तो उनके बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें अपने दिमाग में थोडा थोड़ा पाने का खतरा होता रहेगा। यह ऐसा ही हुआ कि मान लीजिए फिर इनमें से अधिकतर को आप थोड़ी देर के लिए सोचें, और थोड़ी देर, रोज़ दिन में कई बार, और इसे तब तक करें जब तक कि यह मिट्टी में पूरी तरह डूब न जाए। यह भी एक क्रम है।

और अकेले ये ही याद रखना तो जरूरी नहीं है कि कितने लोग थे। सबसे जरूरी चीज़ तो यह याद रखना है कि बहुत सारे लोग नहीं थे और यह कि यह मुझे याद है। यहाँ तक कि जब बच्चा चलना सीखता है तो उसके सामने भी ऊपर और नीचे जाने और घुटनों चलते खेलते समय और न जाने कितने खेल खेलते समय कितने कदम आते हैं, उसे ध्यान नहीं रहता है। तो फिर ऐसा मेरे जैसे गबरू जवान/वयस्क इंसान के साथ क्यों नहीं होगा?
मैं बहुत तेज या जोर से नहीं गिरा था। यहां तक कि जैसे ही मैं गिरा मैंने दरवाजे के बंद होने की आवाज़ सुनी, जिसने मुझे मेरे गिरने के बीच थोड़ी राहत दी। इसका मतलब यह हुआ कि वे स्टिक लेकर मुझे सड़क तक खदेड़ते हुए नहीं आ रहे थे, वे रास्ते चलते वालों के सामने मुझे पीटने नहीं आ रहे थे। अगर वे हकीकत में ऐसा ही करना चाहते, अगर ऐसी ही उनकी मंशा होती तो वे दरवाजे को बंद नहीं करते, उसे खुला रहने देते और वे चाहते कि सड़क पर चलने वाले लोग मेरी कुटाई देखें, वे मुझे घर से बाहर निकलते हुए देखें, वे मेरी इस दुर्दशा का लुत्फ उठाते और फिर कोई फिर कोई आध्यात्मिक उपदेश देते। तो गनीमत थी कि उन्होंने केवल मुझे मेरे घर से ही उठाकर फेंका था और कुछ नहीं किया था।  अभी उन्होंने केवल मुझे बाहर उठाकर फेंकने तक ही सीमित कर दिया था और बहुत ज्यादा अत्याचार नहीं किया था।  इस नर्क में आराम करने से पहले मेरे पास इस तर्क को इसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए काफी समय था।
इन परिस्थितियों में किसी ने भी मुझे तुरंत उठने के लिए मजबूर नहीं किया। मैंने पटरी पर अपनी कोहनी टिकाई, हर मजेदार बात को याद किया, कान पर हथेली को रखा और अपने अपरिचित से हालातों के बारे में सोचने लगा। पर तभी मेरे कानों में मद्धिम सी दरवाजा खुलने की आवाज़ आई, नहीं नहीं मुझे कोई  गलतफहमी नहीं  हुई थी, मैं अपने उस दिवास्वप्न से जैसे जागा, जिसमें पहले से ही एक परिद्रश्य बुना जा चुका था, उस सपने में जंगली गुलाबों के साथ नागफनी थी और मैं एक झटके से उठा, मेरे हाथ पटरी पर एकदम समतल रूप से थे और मेरी टाँगे जैसे उड़ने के लिए तैयार थी। पर ये क्या! ये तो मेरा हैट था, जो उन्होंने मेरी तरफ उछाला था और वह घूमता हुआ उड़ता हुआ मेरे पास आ रहा था। मैंने उसे लपका और उसे पहन लिया। वे अपने भगवान, अपने देवता के हिसाब से तो एकदम ठीक काम कर रहे थे, एकदम सही थे। वे इस हैट को अपने पास रख सकते थे पर यह उनका तो था नहीं, यह तो मेरा था, तो उन्होंने इसे मुझे वापस कर दिया। पर उसका घेरा टूट गया था।
मैं कैसे बताऊँ कि वह हैट कैसा था? और क्यों? जब मेरे दिमाग को यह पता चला कि मैं इसे एक परिभाषा के रूप में न बोलकर केवल इसके अधिकतम आयामों के साथ कहूँगा, तो मुझे ध्यान आया कि मेरे पिता ने मुझसे कहा था, चलो बेटा हम तुम्हारे लिए हैट खरीदने जा रहे हैं, चूंकि यह तो पहले से ही या कहें अनंत काल से एक स्थापित जगह पर मौजूद था। उन्होंने सीधे हैट माँगा। मुझे तो निजी तौर पर कुछ नहीं कहना था और न ही हैट बेचने वाले को। मुझे कभी कभी अब ये लगता है कि मेरे पिता कहीं न कहीं मुझे शर्मिंदा तो नहीं करना चाहते होंगे, मुझे लगता कि वे मुझसे जलते होंगे जो उनकी तुलना में युवा और आकर्षक है, या कम से कम उनसे ज्यादा ताजगी तो है ही, जबकि वे पहले ही बूढ़े  और पिलपिले हो चुके थे। अगले ही दिन से ही मेरा नंगे सिर बाहर जाना वर्जित हो गया था जबकि मेरे सुंदर सुनहरे बाल हवा में खूब उड़ते थे। कभी कभी अकेली सड़क पर मैं उसे उतार लेता था और अपने हाथ में पकड़ लेता था, मगर कांपते हुए। मुझे इसे सुबह और शाम को ब्रश से साफ करना जरूरी था। मेरी ही उम्र के लड़के जिनके साथ हर कीमत पर मुझे घुलना मिलना ही था, वे मेरी हंसी उड़ाते थे।  पर मैंने खुद से कहा कि वे हैट का मजाक नहीं उड़ाते हैं बल्कि वे इस हैट की इज्ज़त करते हैं क्योंकि यह बाकी से ज्यादा चमकदार है और ऐसा चमकदार वे अपना हैट नहीं बना सकते थे या ऐसा करने की धूर्तता या कहें मक्कारी उनमें नहीं थी। मुझे हमेशा ही अपने साथियों की धूर्तता की कमी पर आश्चर्य होता था, मैं जिसकी आत्मा सुबह तक शाम तक केवल खुद की ही तलाश में विकृत होती रहती थी। पर वे शायद वे मुझ पर कुछ उदार थे, उन्हें लगता होगा कौन हंचबैक की बड़ी नाक का मजाक उड़ाए। जब मेरे पिता की मृत्यु हुई तो मैं आराम से इस हैट से छुटकारा पा सकता था, पर मैंने ऐसा नहीं किया। पर मैं इसे कैसे बताऊँ कि ये कैसा है? चलो, फिर कभी, फिर किसी समय।

मैं उठा और खुद को ठीक किया। मैं भूल गया कि मैं कितने बरस का हो सकता हूँ।  मेरे साथ जो कुछ भी अभी हुआ था, तो उसमें से कुछ भी याद रखने लायक नहीं था। यह न तो किसी का उद्गम स्थल था और न ही किसी की कब्र ही थी। या इसमें इतने उद्गम स्थल और कब्रें होंगी कि मैं खो गया। पर मुझे भरोसा नहीं, मुझे ये कहना अतिशयोक्तिपूर्ण लगता है कि मैं अपने जीवन के शिखर पर था तो मुझे लगता है कि मैं अपनी क्षमताओं/अपनी संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व में था। हां, सही है, मैं उन सबका मालिक था। मैंने सड़क पार की और उस घर की तरफ वापस मुड़ा, जिससे मुझे अभी अभी उठाकर फ़ेंक दिया गया था, मैंने उसे छोड़ते समय मुड़ कर भी नहीं देखा था। यह कितना सुंदर था! इसमें खिड़की में जरेनियम था। मैंने खिड़की के जरेनियम पर हाथ रखकर सालों तक न जाने कितना चिंतन किया था, न जाने कितनी विचारों की गंगा में नहाया था। जरेनियम बहुत ही चालाक उपभोक्ता होते हैं, पर मैं अंत में मैं उनके साथ वह करने में सफल हुआ था जो मैं करना चाहता था।  मुझे हमेशा ही इस घर के दरवाजे पसंद आए थे, उनके थोड़े ऊपर ही क़दमों की उड़ान थी। पर इसे कैसे बताऊं? यह एक बड़ा हरा दरवाज़ा था, गर्मियों में यह एक प्रकार की हरी और सफेद पट्टियों वाले सांचे में होता था, जिसमें लोहे का तूफानी नॉकर होता था और चिट्ठियों के आने के लिए एक छेद था, जिसमें चिट्ठियां मिट्टी, मक्खियों के नज़दीक होती थी और स्प्रिंग के साथ एक ब्रास फ्लैप लगा होता था। ओह, कितना कुछ है बताने के लिए। यह दरवाज़ा एक ही रंग के दो खम्भों के बीच में लगा हुआ था, इसमें इसके दाएं पर घंटी लगी थी। पर्दे बहुत ही शानदार थे। यहाँ तक कि एक चिमनी से धुंआ फैलता हुआ और पड़ोसियों की तुलना में ज्यादा उदासी हवा में गायब होता और धुंधला होता दिख रहा था। मैंने जब तीसरे और आख़िरी फ्लोर को देखा तो मुझे मेरी खिड़की बेतरतीब तरीके से खुली हुई दिखाई दी। वहां पर खूब जोरो शोरों से सफाई चल रही थी। कुछ ही घंटों में वे खिड़की को बंद कर देंगे, पर्दे डाल देंगे और पूरी जगह में विसंक्रामक का छिड़काव करेंगे। मैं उन्हें जानता था। मैं घर में खुशी खुशी मर गया होता। तभी मैंने दरवाजे को खुला देखा और मैं बाहर आ गया।
मुझे अपने देखे जाने का डर नहीं था, क्योंकि मैं जानता था कि वे पर्दों के पीछे से मेरी जासूसी नहीं कर रहे होंगे, अगर उन्हें यह करना ही होता तो वे पहले ही कर चुके होते। पर मैं उन्हें जानता था। वे अपनी अपनी मांदों में वापस जाकर अपना काम शुरू कर चुके होंगे।
और मैंने ऊन्हें कुछ नुकसान भी तो नहीं पहुंचाया था न!
मैं इस शहर को बहुत नहीं जानता था, मेरे जन्म और इस दुनिया में मेरा पहला कदम, और फिर अन्य बातें कितना कुछ मैंने अपनी खोज करने के लिए सोचा, खो गया था, पर मैं गलत था। मैं बाहर ही कितना निकला था/मैं जानता ही कितना था। अब, और फिर मैं खिड़की तक गया होता, पर्दों को अलग किया होता और उनसे झांका होता। पर मैं जल्दी से कमरे में बीच में गया, जहां पर बिस्तर था। मैं अपने सामने होने वाली तमाम संभावनाओं के भ्रम में खोने से पहले इस कमरे में आसानी  से  बीमार पड़ सकता था, खो सकता था। पर मैं जानता था कि कैसे ऐसी स्थिति में व्यवहार करना है जो उस समय सबसे ज्यादा जरूरी था। पर पहले मैंने आँखें उठाकर उस आसमान को देखा, जो हमेशा मददगार होता है, जहाँ से हमें मदद मिलती है, जहां कोई सड़क नहीं है, जहां आप मुक्त होकर घूम सकते हैं, जैसे एक रेगिस्तान में और जहां कोई भी आपकी आँखों के रास्ते में नहीं आता, वह निर्बाध होकर देखती हैं, जैसे ही आप आंखें मोड़ते हैं, वैसे ही द्रष्य भी सीमित हो जाता है। यही कारण है कि किसी भी परेशानी में मैं हमेशा आसमान को देखता था, उसी आसमान में जहां पर कोई सीमा नहीं है, कोई फर्क नहीं पड़ता कि जब हम कस्बे, देश, इस धरती के विचारहीन भ्रम से उसे देखने पर उसमें बादल पाते हैं, उसे धूसर पाते है, या बारिश से भरा हुआ पाते है। यह अंत में नीरस ही होना है पर मैं इसमें कोई मदद नहीं कर सकता। जब मैं छोटा था तो मुझे लगता था कि मैदानों की ज़िन्दगी बहुत ही अच्छी होती होगी, तो मैं लाइनबर्ग हीथ गया था। अपने दिमाग में मैदान को रखते हुए, मैं हीथ गया था। हालांकि कई और मैदान वहां से नज़दीक थे पर मेरे दिल से जैसे कोई आवाज़ आती रही कि तुम्हें लाइनबर्ग हीथ ही की तलाश है, तुम्हें वहीं जाना है। कभी कभी आपकी ऐसी बातों में आपके दिमागी पागलपन का भी हाथ होता है। और जब मैं लाइनबर्ग हीथ पहुंचा तो वह सबसे ज्यादा असंतोषजनक साबित हुआ, सबसे ज्यादा असंतोषजनक। मैं वहां से बहुत ही असंतुष्ट होकर लौटा और उसी समय मैं चिंतामुक्त भी वापस आया। हां मैं नहीं जानता कि क्यों, पर मैं इतना असंतुष्ट कभी नहीं हुआ था और अक्सर मैं अपने उन शुरुआती दिनों में उस समय को या उसके बाद के समय को महसूस किए बिना, यकीनन ही बहुत ही राहत में था।

मैं उठा। सच में, क्या चाल थी। मेरे शरीर के निचले अंग एकदम कठोर हो चुके थे जैसे प्रकृति ने मेरे घुटने को उठने से मना कर दिया हो, पैर कदमताल करते समय कभी कभी एकदम दाएं तो कभी एकदम बाएं जा रहे थे। इसके विपरीत, पूरा धड़ एक पुराने चीथड हुए थैले की तरह ढीला हो गया था और एक क्षतिपूर्ति प्रणाली के प्रभावों से जैसे कूल्हे के अनजान और अचानक हिचकोले के साथ झूल रहा था। मैंने अक्सर ऐसी कमियों को दूर करने का प्रयास किया है, अपनी छाती को कड़ा किया, अपने घुटनों को मोड़ा और अपने क़दमों को एक दूसरे के सामने रखकर कदमताल करता हुआ चला, शायद पांच या छह कदम चला होऊंगा, पर हमेशा मेरे साथ यही होता था, मेरा मतलब है संतुलन के खो जाने के बाद गिर जाना। एक व्यक्ति को यह सोचे बिना चलना चाहिए कि वह क्या कर रहा है, उसे ऐसे चलना चाहिए जैसे वह सांस लेता है और जब मैं यह सोचे बिना चलता हूं कि मैं क्या कर रहा हूं मैं उसी मस्त चाल से चलता हूं, और जब मैं अपने दिमाग में चल रही उथलपुथल के बारे में सोचते हुए चलता हूं तो केवल कुछ ही कदम चल पाता हूं और फिर गिर जाता हूं। मैंने फिर फैसला किया कि मैं जैसा हूं वैसा ही रहूँगा। यह सफर मेरे ख्याल से टुकड़ों में ही कम से कम एक निश्चित प्रवृत्ति के कारण था जिससे मैं खुद को पूरी तरह मुक्त नहीं कर सका था और जिन्होंने अपेक्षानुसार ही मेरे चरित्र निर्माण करने वाले वर्षों में यकीनन ही अपनी बहुत गहरी अनुमानित छाप छोड़ी थी। मैं समय की उस अवधि को बता रहा हूँ जो कुर्सी के पीछे से मेरे लड़खड़ा कर चलने से लेकर मेरे पढ़ाई पूरे करने तक विस्तारित है। मेरी उस समय बहुत ही बुरी आदत थी और वह थी अपने कपड़ों में ही पेशाब कर देना या उनमें ही पखाना कर देना, जो मैं साढ़े दस वर्ष की आयु तक में सुबह उठकर नियमित करता था और पूरा दिन सामान्य रहकर और अपने दिन को ख़त्म कर सोचता था कुछ भी तो ख़ास नहीं हुआ था। अपने ट्राउजर को बदलने का ख्याल या अपनी मां को जो केवल मेरा भला ही चाहती थी, ये गुप्त बात बताने का ख्याल भी मेरे लिए एकदम असहनीय था, मैं नहीं जानता क्यों और बिस्तर पर लेटते समय तक कैसे मैं अपनी छोटी जाँघों के बीच यह जलन और बदबू झेलता था, या वह यह जलन और बदबू एकदम मेरे शरीर के नीचे तक मेरी अक्षमताओं के कारण पहुंच जाती थी। इससे मेरी चाल बदल जाती थी, मेरी टांगें एकदम कड़ी होकर कदम दूर दूर होने लगते थे और शरीर के इस अजीबोगरीब लुढ़कने के कारण, लोगों को मुझसे आती बदबू का पता नहीं चल पाता था और वे यह सोचने लगते थे कि मैं दुनिया की परवाह किए बिना और अपने निचले हिस्से के कड़ेपन, जिसे मैं अनुवांशिक गठिया पर मढ देता था, को बताने की एकदम दुविधा से दूर कितना हंसमुख और ज़िन्दगी से भरपूर हूं। मेरी इस युवा होती गंध ने मुझे अपने समय से कुछ पहले ही छुपाने की स्थिति को चाहने के कारण मुझे चिडचिडा और गैर भरोसेमंद बना दिया। किशोरावस्था की बेचारी समस्याएं, कुछ बताया भी नहीं जा सकता। उन्हें सावधानी की जरूरत नहीं होती हम अपने दिल की बातों पर प्रश्न उठा सकते हैं, पर धुंध नहीं हटेगी।
मौसम अच्छा था, मैं सड़क से उठा और पटरी के जितना नज़दीक जा सकता था, मैं चल रहा था। यह इतनी चौड़ी पटरी मेरे लिए इतनी चौड़ी नहीं थी, जब मैं चलता हूं तो मुझे असुविधा देने वाले अजनबियों से बहुत ही चिढ़ होती है। एक पुलिसवाले ने मुझे रोका,और कहा “सड़क वाहनों के लिए है और यह पटरी पदयात्रियों के लिए।” यह एक पुराने क़ानून की तरह था। तो मैं उस पटरी पर वापस आया, लगभग क्षमा याचना के साथ और मैंने वहां खुद को सुरक्षित कर, उछलते उछलते हुए बढ़िया से बीस कदम पूरे किए, जब तक कि मुझे एक बच्चे को कुचलने से बचाने के लिए जमीन पर अचानक से रुकना नहीं पड़ा। वह एक छोटी जीन पहने था, मुझे याद है उसमें छोटी छोटी घंटियाँ थीं, वह घोड़ी पर जा सकता था या कोई क्लाइडेसडेल पर जा सकता था और क्यों नहीं। मैं उसे खुशी खुशी कुचल सकता था, मुझे बच्चों से नफरत थी और यह मेरे लिए एक सेवा ही होती पर मैं उसके नतीजों से डरता था। हर कोई अभिभावक होता है और यही आपको ऐसे उलटे सीधे कदम उठाने से रोकता है। समस्या पैदा करने वाले इन छोटे चूजों, उनकी प्रैम, झूलों, मिठाई, स्कूटर, स्केट, दादा, दादी, नानी, गुब्बारों, और गेंदों और संसार की हर झूठी खुशी के लिए ख़ास के लिए हर किसी को व्यस्त सड़कों पर जगह अरक्षित करनी चाहिए और इनके लिए ख़ास रास्ते बनाए जाने चाहिए। मैं गिर गया और मेरे साथ एक वृद्ध महिला भी गिरीं, जो चमकीली और लेस वाली पोशाक पहने थी और जिसका वजन लगभग सोलह पत्थरों के बराबर होगा/ उसकी चीखों से अच्छी खासी भीड़ जमा हो गयी, मुझे लग रहा था कि उस बूढ़ी औरत की जांघ की हड्डी टूट गयी होगी, बूढ़ी औरतों की जांघ की हड्डी बहुत ही आसानी से टूट जाती है, पर शायद ऐसा नहीं था। मैंने इस पैदा भ्रम का लाभ उठाकर बचकानी कसमें खानी शुरू कर दीं जैसे मैं ही पीड़ित होऊँ और मैं था भी पर में इसे साबित नहीं कर सकता था। वे कभी भी बच्चों को नहीं मारते थे, उन्हें नहीं दबोचते थे फिर चाहे उन्होंने कितना ही कुछ न बिगाड़ा हो, उनके किये कराए पर कितना ही पानी क्यों न फेरा हो। मैं भी बहुत खुशी से तो उन्हें मारूंगा नहीं, मैं नहीं कहता कि मैं अपना हाथ उठाऊंगा, नहीं मैं एक हिंसक पुरुष नहीं हूं, पर जब ये होगा तो मैं और लोगों को प्रोत्साहित करूंगा और उनके साथ ही खड़ा रहूंगा। पर जैसे ही मैंने दोबारा चलना शुरू किया वैसे ही एक और पुलिसवाला एकदम से सामने आ गया, मुझे नहीं लगता कि वह पहले वाला होगा। वह मुझ पर चीखा कि यह सड़क के किनारे की पटरी सभी के लिए है और उसकी बात से जाहिर था जैसे मैं उस श्रेणी में नहीं मिल सकता था। मैंने उससे पूछा तुम क्या चाहते हो कि इस गटर से उठकर मैं कहां चला जाऊं? उसने कहा “भगवान के लिए कहीं भी जाओ, पर दूसरों के लिए भी कुछ जगह तो छोड़ो, अगर तुम यहां पर चलने वाले लोगों के साथ नहीं चल सकते तो बेहतर था कि घर पर ही रहते। शायद यही मैं चाहता था और यह कि उसने मुझे एक घर के साथ तो कम से कम जोड़ा, भी कम संतोषजनक नहीं था। इसी समय एक जनाजा वहां से गुजरा तो लगा कुछ हुआ। वहां पर अनगिनत हैट के झोंके और अनगिनत उँगलियों की फड़फड़ाहट थी। व्यक्तिगत रूप से क्रोस का निशान बनाते समय मैं अपने दिल तक आते आते अपने दाएं, नाक, ठोड़ी, छाती के बाईं तरफ और फिर दाईं तरफ से होता हुआ आ सकता था। पर वे जिस तरीके से कर रहे थे वह एकदम लापरवाह और जंगली तरीके से कर रहे थे, वह ऐसे लग रहा था कि अचानक से ही किसी ढेर में मर गया होगा, कोई सम्मान नहीं, उसके घुटने उसके चिम्बुक और हाथ के नीचे ही किसी तरह रहे होंगे। एक जोशीले युवक ने मृतक को रोका और वह कुछ बुदबुदाया। पुलिसवाले का जहां तक सवाल है तो उसके लिए उसने ध्यान आकर्षित किया, अपनी आँखें बंद की और सलाम किया। घोड़ागाड़ी के अंदर से मुझे शोकाकुल परिजनों की एक जीवंतता की बातचीत की एक झलक मिली, जाहिर है उनके भाई या बहन के जीवन के बारे में ही बात हो रही थी। मैंने सुना कि दोनों ही पेटियों में अर्थी को एक ही तरीके से नहीं रखा गया था, पर अंतर क्या था यह मुझे पता नहीं चल पाया  था। घोड़े तो ऐसे पाद रहे थे और मल त्याग कर रहे थे जैसे कि वे मेले में जा रहे हों। मैंने किसी को भी घुटने के बल बैठे नहीं देखा था।
पर यह अंतिम यात्रा हमें छोड़कर जल्द ही आगे बढ़ गयी, अपनी चाल बढ़ाना बेवकूफी था। परिवार के लोगों को लेकर अंतिम घोड़ागाड़ी जैसे ही आपको पीछे छोड़कर आगे जाएगी लोग अपनी अपनी दुनिया में वापस आ जाएंगे और फिर आप लोग एक दूसरे से आँखें मिलाकर बात कर सकते हैं। तो मैं भी तीसरी बार रुका, अपनी इच्छानुसार मैंने एक घोड़ागाड़ी ली। अभी अभी मैं जिन लोगों के साथ भिड़कर या कहें खूब जोरदार बहस करने के बाद आया था, वे मेरे बारे में बातें कर रहे होंगे, और मेरी एक बुरी छवि बना रहे होंगे। यह एक बड़ा काला डिब्बा था जो अपनी स्प्रिंग पर उछल रहा था और हिचकोले ले रहा था, इसमें छोटी खिडकियां होती है और आप एक कोने में सिकुड़ जाते हैं। इसमें फफूंदी या सीलन वाली बदबू आ रही थी। मेरा हैट उस घोड़ा गाड़ी की छत को छू रहा था। कुछ देर बाद मैं आगे की तरफ झुका और मैंने खिड़की बंद कर दी, फिर मैं घोड़े की तरफ पीठ करके बैठ गया। मैं ऊंघ ही रहा था कि एक आवाज़ से चौंक गया, और वह उस कोचवान  की ही थी। उसने दरवाजा खोला, जाहिर है वह खिड़की से आवाज़ लगाकर थक गया होगा। मुझे केवल उसकी मूंछें ही दिख रही थी, “कहाँ चलना है?” उसका सवाल था। वह अपनी सीट पर मुझसे यह पूछने के लिए बैठ गया था। और ये मैं था जो पता नहीं कितनी दूर पहले से ही आ गया था। मैंने किसी सड़क, स्मारक का नाम खोजने के लिए अपनी याददाश्त पर बहुत जोर डालने की कोशिश की, उसे खुरचा।  मैंने उससे पूछा “क्या तुम्हारी घोड़ागाड़ी बिक्री के लिए है?, पर घोड़े के बिना। घोड़े के साथ मैं क्या करूंगा? पर मैं इस घोड़ागाड़ी के साथ भी क्या करूंगा? क्या मैं जितना चाहूं, उतना इस में रह सकता हूं? मेरे लिए खाना कौन लाएगा? मैंने कहा “चिड़ियाघर चलो”। किसी भी देश की राजधानी में ऐसा हो नहीं सकता कि चिड़ियाघर न हो।  फिर मैंने कहा “बहुत ज्यादा तेज नहीं चलना”। वह हंसा। शायद यह सुझाव कि चिड़ियाघर बहुत तेजी से नहीं चलना है, ने उसे विस्मित किया होगा। जब तक कि घोड़ागाड़ी रहित होने की आशंका न हो। जब तक कि मैं खुद, एक व्यक्ति के रूप में, घोड़ागाड़ी में जिसकी उपस्थिति से इतना बदलाव न आ जाए कि घोड़ागाड़ी का मालिक, छत की छाया में मुझे देखकर और मेरे घुटनों को खिड़की पर टिका देखकर यह न सोचने लगे कि क्या वाकई यह उसी की घोड़ागाड़ी है, वाकई उसी की ही घोड़ागाड़ी है। उसने तेजी से एक बार अपने घोड़े को देखा और खुद को भरोसा दिलाया। पर क्या कोई कभी भी यह जान पाता है कि कोई अचानक से क्यों हँसता है? वह शायद मेरी उसी बात पर हंसा था, पर वह मेरे लिए तो कोई चुटकुला नहीं थी। उसने दरवाजा बंद किया और अपनी सीट पर वापस चढ़ गया। और जल्द ही घोडा भी हवा से बातें करने लगा।
हां, यह थोडा आश्चर्यचकित कर सकता है कि मेरे पास अभी भी थोड़ी रकम थी। अपनी मृत्यु पर मेरे पिता मेरे लिए एक छोटी रकम एक उपहार के रूप में छोड़ गए थे, और उस पर कोई भी प्रतिबंध नहीं था और मुझे अभी भी यह अचरज ही होता है कि किसी ने इसे मुझसे अभी तक चुराया भी नहीं था। फिर मेरे पास धेला भी न होता। और फिर मेरी ज़िन्दगी चलती ही और यहाँ तक कि उसी तरह जिस तरह मैं चाहता था। उस स्थिति का एक नुकसान होता, वह था मेरे द्वारा मेरी मनचाही खरीद की संभावना का लोप होना,  और आपको खुद ही काम करने के लिए बाध्य करना। ऐसा होना दुर्लभ ही है कि जब आप ठनठन गोपाल होते हैं और फिर भी आपके आश्रय स्थल पर समय समय पर अपने आप ही खाना आ जाए। आपको बाहर निकलना ही होता है और अपने आप ही सब कुछ कमाना होता है, कम से कम सप्ताह में एक बार तो आपको खुद कमाना ही होता है। इन हालातों में आपके पास अपना घर और कहने के लिए अपना पता भी नहीं होता है, और इससे आप बच नहीं सकते हैं।  थोड़ी देर से ही मुझे पता चला कि वे किसी मामले के कारण मुझे ही खोज रहे हैं। नहीं पता कौन से चैनल के माध्यम से और मैंने कई दिनों से न तो कोई अखबार ही पढ़ा था और न ही मैंने इन बीते बरसों में किसी से भी खाने के अलावा किसी से तीन या चार बार बात की थी। किसी भी कीमत पर मुझे इन मामलों को निपटा देना चाहिए था, तो मुझे वकील, श्री नीदर से कभी भी मिलने की जरूरत न होती, अजीब लगता है न कि कैसे कोई व्यक्ति कुछ नामों को भूल जाता है जैसे मैं उनके पास कभी गया ही नहीं था। उन्होंने मेरी पहचान की जांच की। इसमें समय लगा। मैंने उन्हें अपने हैट की लाइनिंग में कुछ धातु के अक्षर दिखाए, इसने हालांकि कुछ साबित नहीं किया, पर कुछ संभावनाएं जरूर बढ़ा दीं। उन्होंने हस्ताक्षर करने के लिए कहा। वे एक बेलनाकार पैमाने से खेल रहे थे, वे बोले “तुम इसे एक बैल को मार सकते थे”। उन्होंने गिनने के लिए कहा। एक युवा महिला शायद वेनल, उस साक्षात्कार में उपस्थित थी, और जहां तक मुझे लगता है वह यकीनन ही एक गवाह के रूप में ही होगी। मैंने उस पैसे को एकदम से अपनी जेब में भरना चाहा। उन्होंने कहा “तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।” वहीं मुझे लगा कि उसे मुझे हस्ताक्षर करने से पहले ही गिनने के लिए कहना चाहिए था, शायद वह सही क्रम रहता।  उन्होंने मुझसे पूछा “अगर जरूरत हो तो मैं तुमसे कब मिल सकता हूँ?” सीढ़ियों पर नीचे उतरते हुए मैंने कुछ सोचा। जल्द ही मैं उनके पास वापस पूछने गया कि आखिर यह पैसा कहाँ से आ रहा है क्योंकि मुझे यह जानने का पूरा हक़ है। उन्होंने मुझे एक महिला का नाम बताया, जो मैं अभी भूल रहा हूं। शायद उन्होंने मुझे अपने घुटनों पर तब झुलाया होगा जब मैं एकदम लंगोट में ही लिपटा रहता होऊंगा और उन्हें मुझसे प्यार भी रहा ही होगा। कभी कभी यह पर्याप्त होता है। मैं फिर कह रहा हूँ, कि मैं लंगोट में ही रहा होऊंगा क्योंकि बाद में प्यार होने के लिए बहुत देर हो जाती है। यह तो इस पैसे का शुक्रिया कि मेरे पास थोडा बहुत कुछ तो था, हां बहुत थोडा था।  मेरी आने वाली ज़िन्दगी के लिए अगर सोचूँ तो यह न के बराबर था, जब तक कि मेरे सारे अनुमान ही ध्वस्त न हो जाएं, एकदम निराशावादी न हों।  मैंने अपने हैट के पीछे बने विभाजन के बगल में, घोड़ागाड़ी के मालिक के पीछे थपथपा कर जांचना चाहा कि क्या मैंने सही गिना होगा। एकदम से सोफे से धुल का गुबार सा आया। मैंने अपनी जेब से एक पत्थर निकाला और तब तक तक ठकठकाया, जब तक कि वह गाड़ी रुक नहीं  गयी। मैंने ध्यान दिया कि जहां और गाड़ियां धीरे धीरे करके रुकती हैं यह एकदम से ही रुक गयी। मैंने इंतज़ार किया। पूरी गाड़ी एकदम हिल रही थी।  अपनी ऊंची सीट पर कोचवान सब कुछ सुन रहा होगा। मैं घोड़े को अपनी आँखों से देख रहा था। वह अपनी छोटी लगाम की निर्जीवप्राय मुद्रा में फंसा नहीं था, वह सजग ही था, और उसके दोनों ही कान एकदम चौकन्नी मुद्रा में, उठे हुए थे। मैंने खिड़की के बाहर देखा, हम अब फिर चल रहे थे। मैंने फिर से उस विभाजन पर थपकी दी, जब तक कि गाड़ी दोबारा रुक नहीं गयी। बडबडाता हुआ वह कोचवान अपनी सीट से उतर कर मेरे पास आया। मैंने उसे दरवाजा खोलने से रोकने के लिए अपनी खिड़की नीचे कर दी। वह अब और आग बबूला हो रहा था, गुस्से से उसके चेहरा एक दम लाल हो गया था। मैंने उससे कहा कि मैंने उसे आज पूरे दिन के लिए किराए पर लिया है। उसने जबाव दिया, कि उसे एक शवयात्रा में तीन बजे जाना है। ओह, मृत्यु। मैंने उससे कहा कि मैंने चिड़ियाघर जाने का अपना इरादा बदल दिया है। उसने कहा कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कहां जाएंगे पर वह अपने जानवर के कारण यह चाहता है कि हम जहां भी जाएं वह बहुत दूर न हो। और उन्होंने हमसे आदिम लोगों के बात करने की खासियत की बात की। मैंने उससे पूछा कि क्या आस पास कोई खाना खाने की अच्छी जगह है। मैने उससे यह भी कहा कि वह भे मेरे ही साथ खा सकता है। मैं ऐसी जगहों का नियमित ग्राहक बनना चाहता था। वहां पर एक मेज के दोनों तरफ समान लम्बाई की दो बेंच थी। मेज के उस पार बैठकर वह मुझसे अपने जीवन के बारे में खूब बातें करता रहा, उसने अपनी बीवी के बारे में बात की, अपने जानवर के बारे में, फिर अपने जीवन के बारे में और अपनी उस भद्दी और घटिया ज़िन्दगी के बारे में बात की जो उसके चरित्र के कारण थी। उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं महसूस कर सकता हूँ कि हर मौसम में घर से बाहर निकलने का मतलब क्या है? मुझे पता था कि कुछ घोड़ागाड़ी वाले थे जो अपना पूरा दिन कतार में अपनी गाड़ी के अन्दर अपना पूरा दिन आराम से और गर्मजोशी से बिताते थे, इंतज़ार करते थे कि ग्राहक आकर उन्हें उठाए। ऐसी बातें बीते जमाने में तो सक्षम थी, पर आज अगर इंसान को अपने दिन के ख़त्म होने तक कुछ रखना है तो और भी कई तरीके थे। मैंने उसे अपनी हालत बताई कि मैंने क्या खोया है और मैं आखिर क्या खोज रहा हूं। हम दोनों ही अपनी तरफ से बेहतर समझने का और बताने का प्रयास कर रहे थे। उसे समझ में आया कि मुझसे मेरा कमरा छीन लिया गया है और मुझे दूसरा कमरा चाहिए, पर बाकी उसकी समझ में नहीं आया। उसने अपने दिमाग में केवल वही लिया जहां से इस बात को कोई बाहर नहीं निकाल सकता था कि मुझे एक पूरी तरह से तैयार कमरा चाहिए था। उसने एक दिन पहले का अपनी जेब से शाम का समाचार पत्र निकाला और कुछ ऐसे विज्ञापनों पर एक छोटी पेंसिल से निशान लगाया जिनमें केवल बाहर वालों को ही घर देने के लिए खास तौर पर लिखा गया था। इसमें कोई शक नहीं है कि वह खुद को मेरी जगह पर रखकर सोच रहा था या शायद वह अपने जानवर के कारण उसी शहर के कमरों को मुझे बता रहा था। मैंने उसे यह कहकर और भी भ्रमित कर दिया था कि पलंग को छोड़कर मुझे किसी भी तरह का कोई भी फर्नीचर नहीं चाहिए था और जैसे ही मैं उस कमरे में कदम रखूं, तब तक सारा फर्नीचर यहाँ तक कि नाइट टेबल भी वहां से हट जानी चाहिए। लगभग तीन बजे हम उठे और घोड़े को उठाया और सफर पर चल पड़े। घोड़ागाड़ी वाले ने मुझसे कहा भी कि मैं उसके साथ ही बैठ जाऊं पर मैं चूंकि उस गाड़ी के अंदर बैठने का सपना देख रहा था तो मैं पीछे अन्दर ही बैठा। हमने सुनियोजित तरीके से हर वह घर देखा, जिस पर उसने अखबार में निशान लगाए थे। और सर्दियों का वह छोटा दिन अब ढलने वाला था। कभी कभी मुझे लगता था कि मेरे पास भी इस रात की चादर छाने से पहले कुछ बहुत खुशनुमा दिन थे और खास तौर पर बहुत ही आकर्षक लम्हे भी थे। उसने जिन पतों पर निशान लगाया था या अब उन्हें काट दिया था, जो कोई भी आम इंसान करता, एक एक करके अपने आप ही निरर्थक साबित हो रहे थे और एक एक कर वह उन्हें काटता जा रहा था। बाद में उसने मुझे वह कागज़ दिखाया और उसे सुरक्षित रखने के लिए कहा जिससे उसे दोबारा न खोजना पड़े, जबकि मैं तो अभी तक एकदम अस्तव्यस्त था। खिड़की के बंद होने के बावजूद, घोड़ागाड़ी की चरमराहट और सड़क पर गाड़ियों के शोर के बावजूद, मैंने उसे उसकी ऊंची सीट पर बैठकर गाते हुए सुना। उसने शवयात्रा में जाने की जगह मेरा साथ चुना था, यही मेरे लिए बहुत उपकार की बात थी और इसके लिए मैं पूरी ज़िन्दगी के लिए उसका कर्जदार हो गया था। वह गा रहा था “वह उस जगह से बहुत दूर है जहां उसका युवा नायक है” और यही शब्द मुझे याद हैं। हर पड़ाव पर रुकने पर वह अपनी सीट से उतरता और मुझे मेरी सीट से उठने में मदद करता। मैं दरवाजे की घंटी बजाता था, वह मुझे रास्ता बताता था और कभी कभी मैं घर के अंदर गायब हो जाता था। मुझे लगता मेरा एक घर, जो मेरा है केवल मेरा, ओह कितने समय के बाद, केवल मेरा घर। वह सड़क की पटरी पर मेरा इंतज़ार करता और वापस घोड़ागाड़ी में चढने में मेरी मदद करता। अब मैं उसके अहसानों के बोझ तले खुद को महसूस करने लगा था। वह अपनी सीट पर वापस जाता और हम दोबारा सफर पर शुरू हो जाते। तभी यह हुआ। वह रुका, मैंने अपने आलस को झकझोरा और नीचे उतरने के लिए तैयार हुआ। पर वह दरवाजा खोलने के लिए नहीं आया बल्कि अपनी बांह पकड़ने के लिए दी, जिससे मैं अपने आप उतर सकूं। वह लैंप जला रहा था। मुझे उनमें मोमबत्तियां होने के बावजूद लैंप बहुत पसंद थे और जैसे पहली लैंप के रूप में सितारे को ही समझता था। मैंने उससे पूछा कि क्या मैं दूसरा दिया जला सकता हूं क्योंकि पहला वह जला चुका था। उसने मुझे अपना माचिस का डिब्बा दिया। मैंने उसके कुंडे को घुमाते हुए एक छोटे उभरे हुए शीशे को खोला, जलाया और उसे बंद कर दिया जिससे उसकी बत्ती आराम से जले और उसके छोटे घर में कुछ खुशी, गर्माहट लाए और हवा से बचे। मुझे इससे खुशी मिली। हालाँकि लैंप की उस रोशनी से हमने तो कुछ नहीं देखा और घोड़े की धुंधली सी परछाईं सी ही बनी, पर दूसरों को जरूर बहुत दूर से हवा में झूलती हुई पीली रोशनी दिख रही थी। जब भी गाड़ी किसी की आँख के सामने आती तो लाल या हरा भी एक बड़े समचतुर्भुज की तरह दिखता।

जब हमने कोचवान  के बताए हुए अंतिम पते को भी परख लिया, तो वह मुझे एक होटल में ले आया जहां पर वह जानता था कि मैं आराम से रहूँगा। हां होटल में लाने का कुछ मतलब भी था, यह सही भी था। जब एक बार उसने सलाह दे दी, तो उससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए था। उसने आँख मारते हुए कहा कि यहाँ हर प्रकार की सुविधा मिलेगी। मैंने उसके साथ यह बात सड़क की पटरी पर उस घर के सामने कही, जो एकदम से सामने आ गया था। मुझे याद है कि लैंप के नीचे, घोड़े की बगल एकदम खोखली और नम लग रही थी और दरवाजे के हत्थे पर घोड़ागाड़ी के मालिक के हाथ में उसके लकड़ी के दस्ताने थे। उस घोड़ागाड़ी की छत मेरी गर्दन तक ही थी। मैंने उससे शराब पीने के लिए कहा। घोड़े ने सुबह से कुछ भी खायापिया नहीं था। मैंने ये उस कोचवान से कहा तो उसने जबाव दिया उसका घोड़ा जब तक अस्तबल न पहुँच जाए, तब तक कुछ नहीं खाता पता है। अगर वह काम के दौरान कुछ खा ले, जैसे कोई सेब या गन्ना कुछ भी तो उसके पेट में दर्द होने लगेगा और उदरशूल हो जाएगा, जिसे वह मर भी सकता है। यही कारण है कि उसके दोनों जबड़ों को एक बद्धी से बांधकर रखा जाता है, क्योंकि किसी न किसी कारण से वह आँखों से ओझल तो हो ही जाता है, तो वह आसपास से गुजरने वालों की दया का शिकार न हो जाए, इसलिए ऐसा करना पड़ता है। कुछ ही ड्रिंक के बाद उस कोचवान ने मुझसे कहा कि उसे और उसकी पत्नी को बहुत अच्छा लगेगा अगर मैं उनके यहां रात गुजारूं। उसका घर बहुत दूर भी नहीं था।  शांति के असीम फायदे के साथ उन भावनाओं को याद करते हुए मुझे लग रहा था कि उसने पूरे दिन कुछ भी किया नहीं था और लौट फिर कर अपने घर आ गया था। वे एक अस्तबल ऊपर रहते थे, एक बड़े से आँगन से पीछे। एकदम आदर्श स्थिति, मैं उसके साथ रह सकता था। अपनी पत्नी से मिलवाने के बाद अचानक से ही वह हमें छोड़कर गायब हो गया। वह मेरे साथ अकेले सहज अनुभव नहीं कर रही थी। मैं समझ सकता हूं, मैं भी  ऐसे अवसर पर चकित सा महसूस करता हूं। या तो इसे ख़त्म करना था या आगे बढ़ना था। मैंने इसे अंत करने का फैसला किया और कहा कि मैं नीचे अस्तबल में सो जाऊंगा और पलंग की तरफ बढ़ा। कोचवान ने इसका विरोध किया पर मैंने जोर दिया। उसने अपनी पत्नी को मेरे सिर पर होने वाले फोड़े को दिखाया, जो मैंने शिष्टाचार वश हटा दिया था। उसने कहा “तुम्हें इसे सही कराकर लाना चाहिए था” कोचवान ने एक डॉक्टर का नाम बताया जिसकी वह इज्ज़त करता था और जिसने उससे एक सीट की कठोरता के जैसे छुटकारा दिलाया था। उसकी पत्नी ने कहा “अगर वह अस्तबल में सोना चाहता है तो क्या समस्या है, उसे सोने दो” कोचवान ने मेज से लैंप उठाया और मुझे सीढ़ियों या कहें नसैनी से लेकर नीचे गया जिससे उसकी पत्नी के पास एकदम अन्धेरा हो गया। उसने घोड़े का कंबल जमीन पर भूसे पर एक कोने में बिछाया और मुझे एक माचिस की डिब्बी दी, जिससे अगर मुझे जरूरत हो तो मैं उसे जलाकर रोशनी कर सकूं। मुझे याद नहीं कि घोड़े उस समय क्या कर रहे थे। उस अंधेरे में मुझे उसकी अजीब आवाज़ से यह लगा कि वह शराब पिए हुए है, चूहों की फौज का अचानक से आना और कोचवान और उसकी पत्नी की फुसफुसाहट, जिसमें वे यकीनन ही मेरी बुराई कर रहे होंगे। मैंने माचिस की डिब्बी अपने हाथ में ली, हां सुरक्षा माचिस की एक बड़ी डिब्बी। मैं रात में उठा और एक तीली जलाई। उस क्षीण सी रोशनी में मुझे वह घोड़ागाड़ी खोजने में मदद हुई। मुझे उसी समय उस अस्तबल को आग लगाने की तीव्र इच्छा ने घेर लिया। मैंने उस अँधेरे में घोड़ागाड़ी को खोजा और दरवाजा खोला, उसमें चूहे उछलकूद मचा रहे थे, जैसे ही वे उससे बाहर निकले, मैं उसमें चढ़ गया और जैसे ही मैं उसमे सही से बैठ गया तो मैंने दखा कि अब घोड़ागाड़ी ज्यादा ऊंची नहीं है, चूंकि उसके शाफ्ट जमीन पर थे तो ऐसा होना लाजमी भी था। यह बेहतर था तो इससे मैं पीठ लगाकर आराम से बैठ गया, दूसरी सेट पर मेरे पैर मेरे सिर से ऊपर थे। कई बार रात में मुझे ऐसा लगा कि घोड़ा मेरी तरफ ही देख रहा है और मैंने उसके नथुने से आती हुई सांस को भी महसूस किया। अब चूंकि उसने जीन नहीं पहनी हुई थी तो गाड़ी में मेरी मौजूदगी उसे परेशान कर रही होगी। मुझे बहुत ठण्ड लग रही थी और मैं कंबल ले जाना भूल गया था और उसके लिए उठना था और उसे लाना था। घोड़ागाड़ी की खिड़की से अब अस्तबल की खिड़की अब और ज्यादा साफ दिखाई दे रही थी। मैं उस घोड़ागाड़ी से बाहर आया। अब अस्तबल में उतना अँधेरा नहीं था, मैंने धुंधली आँखों से हौदिया, कठरे, लटकती हुई जीन, और बाल्टी और ब्रश सभी को देखा। मैं दरवाजे तक गया पर उसे खोल नहीं सका। घोड़े ने मुझसे अपनी आँखें नहीं हटाई थी, क्या घोड़े कभी सोते भी हैं? मुझे ऐसा लग रहा था कि कोचवान से उसे बांध दिया था, शायद हौदिया आदि से। तो मुझे खिड़की से ही अन्दर जाना था। पर यह भी सरल न था, तो सरल क्या था फिर?  मैंने पहले अपना सिर घुसेड़ा, मेरे हाथ आंगन की जमीन पर एकदम समतल थे, जबकि मेरी टांगें अभी भी फ्रेम से बाहर आने के लिए लटक रही थी। मुझे घास का वह गुच्छा अभी भी याद है जिसे  मैंने खुद को निकालने के लिए दोनों ही हाथों से हटाया था। मुझे अपना कोट उतारना चाहिए था और उसे उसी खिड़की से बाहर फेंकना चाहिए था जिससे मैं अभी अभी अंदर आया था, पर इसका मतलब होता कि मैं उसके बारे में सोच रहा हूं। जैसे ही मैं आंगन से निकला तब ही कुछ मेरे दिमाग में आया। शांति, क्लांति। मैंने माचिस की डिब्बी में एक बैंकनोट रखा, और आँगन में वापस गया और उसे खिड़की के उसी कोने में रख दिया जहां से मैं अभी आया था। घोडा अभी भी खिड़की पर ही था। पर जैसे ही मैं सड़क पर कुछ कदम आगे बढ़ा, मैं वापस आंगन में गया और मैंने अपने बैंकनोट को वापस ले लिया। मैंने माचिस को वहीं छोड़ दिया, आखिर वे मेरी तो थी नहीं। घोड़ा अभी भी खिड़की पर ही था। अब मैं घोड़े से ऊब गया था। सवेरा होने भी वाला था। मैं नहीं जानता मैं कहाँ था? मैं बस सूरज के उगने की तरफ चलता जा रहा था, उस तरफ बढ़ता जा रहा था जहां से मुझे लगता था कि सूरज उगना चाहिए, मैं बस जल्दी से जल्दी उस रोशनी के नज़दीक जाना चाहता था। मैं या तो समुद्र या रेगिस्तान के क्षितिज पर जैसे था। जब मैं सुबह बाहर होता हूँ, तो मैं सूरज से मिलने जाता हूँ, और शाम को जब मैं बाहर होता हूँ तो मैं तब तक उसे देखता हूं, उसका पीछा करता रहता हूं जब तक मैं उस ढले हुए सूरज के साथ डूब न जाऊं। मैं नहीं जानता कि मैंने यह कहानी क्यों सुनाई। मैं कुछ और सुना सकता था। शायद अगली बार आपको कोई और कहानी सुनाऊं। मेरे दोस्तों, पवित्र आत्माओं, आप खुद ही देखें कि आप किसके जैसे हैं। 

नया साल

फिर से वह वहीं पर सट आई थी, जहाँ पर उसे सटना नहीं था। फिर से उसने उसी को अपना तकिया बना लिया था, जिसे वह कुछ ही पल पहले दूर फेंक आई थी। उसने...